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नबी करीम ‎ﷺ ‏जब आसमान के गोशे से बदली उठते देखते तो काम ‎( ‏धाम ‎) ‏सब छोड़ देते यहां तक कि नमाज़ में होते तो उसे भी छोड़ देते, ‏और यूं दुआ फ़रमाते: ‏

🌺नबी करीम ﷺ जब आसमान के गोशे से बदली उठते देखते तो काम ( धाम ) सब छोड़ देते यहां तक कि नमाज़ में होते तो उसे भी छोड़ देते, और यूं दुआ फ़रमाते: 

अल्लाहुम्मा इन्नी आउज़ुबिका मिन शर्रीहा
ए अल्लाह! मैं इसके शर से तेरी पनाह मांगता हूँ ...

फिर अगर बारिश होने लगती,तो आप फ़रमाते: 
अल्लाहुम्मा सय्यीबन हनिअन
 ए अल्लाह! इस बारिश को ज़ोरदार और ख़ुशगवार और बाबरकत बना।..

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रोजे की फजीलत

2 रोजे की  फजीलत जब रमजान आता हे तो आसमान के दरवाजे खोल दिये जाते है, जहन्नम के दरवाजे बन्द कर दिये जाते है ओर शयातीन जन्जीरो से जकड़ दिये जाते है। (लुलु वर मरजान-65 2, अबु हुरैरा रजि.) रमजान मे उमरा करने से हज का सवाब मिलता है। (मुस्लिम-225 5-56 इब्ने अब्बास रजि.) रमज़ान में सवाब की नीयत से रोजा रखने ओर कयाम करने वाले के गुजरे सब गुनाह माफ कर दिये जाते है। (बुखारी-1901, इब्ने माजा-1641 अबु हुरेरा रजि.) रोज़ा कयामत के दिन रोजेदार की सिफारिश करेगा । (मुसनद अहमद, तबरानी, इबने अम्र बिन आस रजि.) (क) रोजे का अज्र (बदला) बे हिसाब है। (ख) रोजेदार की मुंह की बू कयामत के दिन अल्लाह तआला को मुश्क की खुशबू से भी ज्यादा पसंद होगी। (बुखारी-1894 मुस्लिम-1997-98 अबु हुरैरा रजि.) ‘जन्नत में रयान‘ नाम का एक दरवाज़ा है। कयामत के दिन उस दरवाजे से सिर्फ रोजेदार जन्नत में दाखिल होगे। (मुस्लिम, बुखारी-1896, इब्ने माजा-1640, सहल बिन सअद रजि.) रमजान का पूरा महीना अल्लाह तआला हर रात में लोगों को जहन्नम से आजाद करता है। (इब्ने माजा-1642 अबु हुरेरा रजि.) अल्लाह तआला हर रोज़ इफ्तार के वक्त लोगों को जहन्नम से ...